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An undated photo of Pakistani children studying the Quran at a religious school in Lahore, Pakistan. Pakistan's religious schools, or madrassas, face renewed scrutiny following the recent London bombings, with Western leaders alleging that many serve as breeding grounds for violent extremists. The defiant heads of some schools, however, say they are easy targets in a campaign against Islam. (AP Photo/K.M. Chaudary)

ये मदरसे बच्चों को तलाक़ के ‘सही’ तरीक़े सिखाएंगे :भारत की एक प्रमुख इस्लामिक संस्था इस्लाम के क़ानून के मुताबिक मुस्लिम बच्चों को तलाक़ के सही तरीके सिखाएगी.

15 हज़ार मदरसों को नियंत्रित करने वाले दरगाह-ए-आला हजरत ने तीन तलाक़ पर प्रतिबंध के अदालती आदेश के बाद अपने इस निर्णय की घोषणा की. इस्लाम के विद्वानों ने तर्क दिया कि तीन तलाक़ इस्लाम के नियमों के मुताबिक नहीं हैं.

तलाक़ पर आएगा अध्याय

इस संस्था के एक वरिष्ठ मौलवी ने कहा कि वो तलाक़ पर एक अध्याय लाएंगे.

क़ुरान और इस्लाम के क़ानून के जुड़े मदरसों के पाठ्यक्रम में पहले से मौजूद तलाक़ के अध्याय बहुत विस्तृत नहीं हैं.

दरगाह-ए-आला हजरत के एक वरिष्ठ मौलवी मौलाना शहाबुद्दीन रिज़वी ने बीबीसी हिंदी संवाददाता समीरात्मज मिश्र से कहा, “सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हमने मदरसों के साथ जुड़े मौलवियों की एक बैठक आयोजित की और उनसे छात्रों और शुक्रवार की प्रार्थना के माध्यम से तलाक़ के सही तरीके के बारे में समुदाय को सूचित करने को कहा.”

उन्होंने बताया, “इससे भारत में व्यापक रूप से चलने वाला तीन तलाक़ इस्लाम के क़ानून के अनुरूप नहीं है स्पष्ट होगा.”

मदरसे में पढ़ते हैं लड़के

मदरसों में पांच से 16 साल के उम्र के केवल लड़के पढ़ते हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि किस उम्र के छात्रों को तलाक़ के विषय में सिखाया जाएगा.

रिज़वी ने कहा, “चूंकि इन मदरसों में केवल लड़कों को ही भर्ती किया जाता है, इसलिए यह उम्मीद की जा रही है कि वो इस संदेश को अपने परिवारों तक पहुंचा देंगे.”

एक बार जब यह निकाय इस पाठ्यक्रम को विकसित कर लेगी, वो इसे अन्य मदरसों से साझा करेगी. फिर मदरसों के पास विकल्प होगा कि वो इसे लागू करना चाहते हैं या नहीं.

जुलाई 2018 से लागू होगा पाठ्यक्रम

मदरसों के पाठ्यक्रम में इस अतिरिक्त जानकारी को अगले शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत के समय जुलाई 2018 में ही लागू किया जा सकेगा.

ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बावजूद अपने पति के ख़िलाफ़ मुस्लिम महिलाओं के तीन तलाक़ की शिकायतें दर्ज कराने की रिपोर्ट्स मिल रही हैं.

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