‘दो साल पहले सुषमा ने निर्मला सीतारमण को लंच टेबल से उठा दिया था’

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‘दो साल पहले सुषमा ने निर्मला सीतारमण को लंच टेबल से उठा दिया था’:
मोदी मंत्रिमंडल के तीसरे फेरबदल में 9 राज्य मंत्रियों को शामिल करने के साथ ही 4 मंत्रियों को प्रमोट किया गया है। इनमें निर्मला सीतारमण भी शामिल हैं। उन्हें प्रमोट करने का फैसला चौंकाने वाला है। वे राज्य मंत्री थीं। नरेंद्र मोदी ने अब उन्हें डिफेंस मिनिस्टर बनाया है। वे देश की पहली फुलटाइम महिला रक्षा मंत्री बन गई हैं। सीनियर जर्नलिस्ट और पॉलिटिकल एनालिस्ट प्रदीप सिंह एक वाकये का जिक्र करते हैं जब निर्मला सीतारमण को लंच टेबल से सुषमा स्वराज ने उठाया था।

क्या था वो वाकया…

राजग सरकार का एक साल पूरा होने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी गई। कॉन्फ्रेंस के बाद जर्नलिस्ट्स के साथ लंच चल रहा था। एक टेबल पर सुषमा स्वराज और कुछ जर्नलिस्ट बैठे थे। एक-दो चेयर खाली पड़ी थीं तो निर्मला सीतारमण भी वहां आकर बैठ गईं। सिंह बताते हैं- जैसे ही वे बैठीं, सुषमा स्वराज भड़क गईं और उन्हें वहां से उठा दिया। इस घटना और उनके प्रमोशन के कई मायने निकाले जा सकते हैं। पहला सरकार में अहम पदों पर महिला भागीदारी बढ़ाने के लिए उन्हें रक्षा मंत्री बनाया गया। दूसरा उनके अच्छे काम का इनाम मिला और तीसरा उनका कद भी अब सुषमा स्वराज के बराबर कर दिया गया है।

ऐसे मंत्री जल्द ही पहली पंक्ति के नेताओं की जगह लेंगे –

निर्मला सीतारमण को उनकी बेहतरीन परफॉर्मेंस का इनाम मिला है। कॉमर्स मिनिस्टर के तौर पर उन्होंने अच्छा काम किया। तमाम मतभेदों के बीच चीन से कारोबारी रिश्तों को बेहतर बनाए रखा। जब उन्हें पार्टी प्रवक्ता बनाया तो हर मुद्दे पर पार्टी के पक्ष को मजबूती और गंभीरता के साथ रखा। ”नरेंद्र मोदी ने परफॉर्मेंस के बेस पर निर्मला जैसे मंत्रियों का प्रमोशन किया है। मोदी को इस बात का कोई फर्क नहीं पड़ने दिया गया कि ऐसे मंत्री कौन-सी जाति से हैं या किस राज्य से हैं? पीयूष गोयल ने पावर सेक्टर में शानदार काम किया, जबकि मुख्तार अब्बास नकवी ने खुद को अच्छे संसदीय कार्य राज्यमंत्री और अल्पसंख्यक मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के तौर पर साबित किया। धर्मेंद्र प्रधान ने आम लोगों से जुड़ी योजनाओं में करिश्मा किया। इन सभी को सिर्फ और सिर्फ अच्छे काम का नतीजा मिला।” ‘प्रमोट किए गए मंत्री जल्द ही पहली पंक्ति के कुछ नेताओं की जगह ले लेंगे ताकि दूसरी पंक्ति में नए लोगों को लाया जा सके। ये सभी मंत्री 2019 के चुनाव के बाद या उससे पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता घोषित हो जाएंगे।

किस वजह से चुने गए बाकी नेता?

नए राज्यमंत्रियों में ब्यूरोक्रेट्स को पद पर रहते हुए शानदार परफॉर्मेंस और ईमानदारी की वजह से लिया गया है। इनमें आरके सिंह ने तो समस्तीपुर के डीएम रहते लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ्तार तक कर लिया था। प्रदीप सिंह कहते हैं, इसे इस तरह देखने की जरूरत है कि आरके सिंह ने अपनी ड्यूटी के दौरान किसी के कद और पद की परवाह नहीं की। अपने काम को पूरी ईमानदारी से किया। आरके सिंह भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को लेकर जितने उग्र हैं उससे ज्यादा ईमानदार हैं।वहीं, हरदीप सिंह पुरी को शहरी विकास मंत्रालय की योजनाओं को तेजी और ईमानदारी से पूरा करने के लिए लाया गया है। प्रदीप सिंह के मुताबिक चारों ही ब्यूरोक्रेट्स को उनकी अच्छी छवि की वजह से मंत्रिपरिषद में जगह दी गई है ताकि बचे हुए समय में आम लोगों से जुड़ी योजनाओं को पूरा किया जा सके।

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